मंगलवार, 3 नवंबर 2015

तपस्या

मनुष्य के अंदर विद्यमान सत्य अस्तित्व आत्मा जब विजातीय असत् प्रकृति के साथ मोंह सम्बंध कर लेती है तो फलत: अस्थिरता, उद्विग्नता, अनिश्चय की मानसिक स्थितियाँ जन्म लेती हैं । गुरू द्वारा सुझाये गये निदान, मोंह का त्याग करने में क्लेष उठाना पडता है । इसी को तपस्या कहा जाता है । परंतु सत्य को पाने के लिये तपस्या अनिवार्य होती है । 

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