भगवद्गीता
शुक्रवार, 20 नवंबर 2015
भक्तयोगी
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि समस्त योगियों में वह योगी जो श्रद्धापूर्वक मेरी पूजा करता है मेरी भक्ति करता है और उसकी आत्मा सदैव मुझमें ही बसती है मैं उसे सबसे अधिक प्रिय मानता हूँ ।
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