भगवद्गीता
शनिवार, 7 नवंबर 2015
भविष्य का भय : चरण 3
अर्जुन अपने मस्तिष्क का भय व्यक्त करते हुये जैसे एकदम त्रस्त दशा का अनुभव कर कहता है हे कृष्ण कृपया मेरे मस्तिष्क में उत्पन्न हुये संदेह का निवारण कीजिये क्योंकि आप के अतिरिक्त कोई दूसरा नहीं है जो मेरे भय का निवारण कर सके ।
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