अर्जुन अपने मस्तिष्क में व्याप्त भय को आगे व्यक्त करते हुये
कहता है कि हे महाबाहो क्या ऐसा व्यक्ति जिसे योग की दशा प्राप्त होने में सफलता
नहीं मिल पाती है वह दोनो से ही वंचित नहीं रह जाता है और आत्मा प्रधान जीवन पाने
की राह में लावारिस भटकता है । क्या उसका विनाश नहीं हो जाता है ।
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