गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि हज़ारो में से कोई एक व्यक्ति
सत्य को जानने के लिये अपनी पूर्णता के लिये प्रयत्नशील होता है | इन प्रयत्नशील जिज्ञासुओं में से जो कोई
अपने को पूर्ण योगी बनाने में सफल भी हो जाता है, वह भी मेरे सत्य रूप को नहीं जान पाता है ।
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