बुधवार, 25 नवंबर 2015

व्यापक स्वरूप की व्याख्या

गुरू ज्ञान के जिज्ञासु अर्जुन को आत्मज्ञान तथा आत्मस्वरूप का ब्रम्ह के साथ युत होने का उपदेश करने के उपरांत उसे और आगे ब्रम्ह का विस्तार संसार के समस्त रूपों में बताने और अनुभव कराने के उद्देष्य से आगे उपदेश करते हैं । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें