मंगलवार, 24 नवंबर 2015

व्यापक रूप

ध्यान योग का समस्त विस्तार बताने के बाद गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे हे अर्जुन अब तुम सुनो कि जो व्यक्ति योग की अवस्था में अपने को स्थापित कर अपने मस्तिष्क को पूर्ण रूप से मेरे ध्यान में संलग्न कर मुझे जानना ही अपना सम्पूर्ण लक्ष्य निर्धारित कर प्रयत्न करता है वह निष्चय ही मुझे जानने में सफल होता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें