सोमवार, 2 नवंबर 2015

निदान की व्याख्या

प्रकृतीय मोंह का जीवन यापन करते हुये मस्तिष्क का आम अभ्यास बन जाता है कि वह अपनी इच्छा की पूर्ति को लक्षित कर उपलब्ध सम्भावनाओं में से हल खोजता है । इस प्रक्रिया द्वारा मस्तिष्क अपनी अशांति और उद्विग्नता स्वयं आमंत्रित करता है । गुरू इसका सरल निदान बताये कि मोंह को त्याग दो समस्त मानसिक चंचलता शांत हो जावेगी । 

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