मंगलवार, 17 नवंबर 2015

दृढ उद्यम की व्याख्या

गुरू द्वारा बताये गये उपदेश से प्रत्येक जिज्ञासु साधक के लिये एक अवलम्ब मिलता है कि यदि कंचिद कमजोरियों के कारण पूर्ण सफलता इस जन्म में ना भी मिली तो प्रयत्न नष्ट नहीं जायेगे बल्कि आगे के जन्मों में इस जन्म के प्रयत्न सहायक होंगे और साधना सिद्धि की ओर आगे बढेगी । भगवद्गीता का संदेश यह आस्था जागृत करने वाला है कि प्रत्येक व्यक्ति को ब्रम्ह स्वरूप तक उत्थान कराना प्रकृति का लक्ष्य है । 

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