गुरू द्वारा बताये गये उपदेश से प्रत्येक जिज्ञासु साधक के लिये
एक अवलम्ब मिलता है कि यदि कंचिद कमजोरियों के कारण पूर्ण सफलता इस जन्म में ना भी
मिली तो प्रयत्न नष्ट नहीं जायेगे बल्कि आगे के जन्मों में इस जन्म के प्रयत्न
सहायक होंगे और साधना सिद्धि की ओर आगे बढेगी । भगवद्गीता का संदेश यह आस्था जागृत
करने वाला है कि प्रत्येक व्यक्ति को ब्रम्ह स्वरूप तक उत्थान कराना प्रकृति का
लक्ष्य है ।
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