गुरू ने बताया कि सिद्ध योगी की स्थिति पानेके लिये सतत्
प्रयत्न करना होगा । किसी एक जन्म में व्यक्ति ब्रम्ह के साथ जो रिश्ता स्थापित
करता है और इस रिश्ते से जो बल अर्जित करता है वह मृत्यु होने पर समाप्त नहीं होता
है । व्यक्ति के अगले जन्म के प्रयत्नों का प्रारम्भ वहीं से होता है जहाँ तक
पहुँच कर पूर्व जन्म के प्रयत्न मृत्यु के कारण स्थगित हो गये थे । इन प्रयत्नो के
लिये मृत्यु कोई सीमा रेखा नहीं होती है ।
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