ब्रम्ह को पाने के लिये जितने भी मार्ग
बताये गये हैं गुरू उन सभी की तुलना करते हैं । योगी जो अपने को ब्रम्ह के साथ युत
करता है जोडता है । ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा हम सभी के अंदर विद्यमान है ।
आत्मा को ब्रम्ह के साथ जोडना – आत्मा में ब्रम्ह की अनुभूति करना – आत्मा का
अनुभव पाना यह योग का क्षेत्र है । तपस्वी भी उसी ब्रम्ह का अनुभव पाने के लिये
अपने को समस्त सुख से वंचित कर तपस्या द्वारा साधना करता है । ध्यान के पथ से
साधना कर ज्ञानमार्गी भी उसी ब्रम्ह का अनुभव पाना चाहता है । वेदों में वर्णित
यज्ञ क्रियाँओं द्वारा कर्मकाण्डी भी उसी ब्रम्ह का ज्ञान पाने को चेष्टारत होता
है । परंतु गुरू इन सभी में योगी को सर्व श्रेष्ठ बताते हैं ।
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