रविवार, 15 नवंबर 2015

तुलनात्मक स्थिति की व्याख्या

गुरू द्वारा व्यक्त वेदों द्वारा ब्रम्ह का ज्ञान तथा योग द्वारा ब्रम्ह का अनुभव की तुलनात्मक अभिव्यक्ति का अभिप्राय यह है कि जिस प्रकार किसी व्यक्ति को यदि कोई नदी पार करना है तो उसे नौका चाहिये परंतु जिस व्यक्ति ने नदी पार कर लिया है तो उसे नौका से क्या प्रयोजन रहेगा उसी प्रकार वेद का ज्ञान ब्रम्ह तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्थ करता है जबकि योग व्यक्ति को ब्रम्ह का साक्षात् अनुभव करा देता है इसलिये योगी को वेद के ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें