इस रूप संसार में सामान्य स्थिति में प्रत्येक मनुष्य प्रकृतीय
मोंह में जीवन यापन कर रहा है । गुरू कहते हैं कि हज़ारों में कोई एक व्यक्ति होता
है जो सत्य को जानने के लिये उद्यत होता है । इन उद्यमियों में से भी ज्यादातर लोग
योग की स्थिति प्राप्त नहीं कर पाते हैं । जो लोग योग की स्थिति प्राप्त भी कर लेते
हैं वह भी मेरे सत्य स्वरूप को नहीं जान पाते हैं ।
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