गुरू का कथन व्यक्त करता है कि जो कार्य व्यक्ति ब्रम्ह से
युक्त होकर करेगा उस कार्य को ब्रम्ह स्वयं देख रहा है कि किस निष्ठा से वह
व्यक्ति उस कार्य को कर रहा है इसलिये असफलता की कल्पना कर के भयभीत मत होवो
ब्रम्ह सदैव न्यायपूर्ण ही करेगा । आप अपनी निष्ठा के प्रति सज़ग रहो । आप अपनी
निष्ठा को सत्य रखो ।
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