गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन के मस्तिष्क में व्याप्त भय को जानने
के बाद बोले हे पार्थ जो व्यक्ति योग का पथ अपनाता है उसका ना ही इस जन्म में और
ना ही बाद के जन्मों में कोई भी अहित नहीं हो सकता है यहाँ तक कि हे मित्र जो
व्यक्ति योग का पथ अपनाता है उसे किसी दु:ख का सामना नहीं करना पडता है ।
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