मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

कर्मयोग का अभ्यास

यज्ञ, दान और तप के कर्मों के सम्बंध में गुरू ने जो उपदेश किया है वह उनके द्वारा पूर्व में बताये गये कर्मयोग की पुन: पुष्टि के समान है । गुरू के उपदेश में सर्वत्र इसी मत की अनुशंसा है कि कर्म का त्याग नही अपितु इच्छा से प्रेरित कर्म का त्याग और त्याग को अधिक स्पष्ट करते हुये बताये कि किये जाने वाले कर्म के परिणाम से जनित होने वाले फल का त्याग होना चाहिये । 

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