भगवद्गीता
बुधवार, 25 अक्टूबर 2017
प्रतिनिधि रूप
आचार्य आदिशंकर बताये कि ज्ञानी भी कार्य करता है परंतु उसका कार्य मात्र एक ब्रम्ह के प्रतिनिधि के रूप में होता है । कार्य में कर्ता व्यक्ति की मानसिक स्थिति का अधिक महत्व है । व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति में किया गया कार्य वर्जित बताया गया है ।
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