भगवद्गीता
मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017
अहंकार से मुक्त
कर्म और कर्ता को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर अर्जुन को बताये कि जो अहंकार की भावना से मुक्त है
,
जिसकी बुद्धि मलीन नहीं है
,
वह इन मनुष्यों को मारता हुआ भी मारता नहीं है और वह बंधन में नहीं पडता है ।
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