भगवद्गीता
गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017
सन्यास और त्याग
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि बुद्धिमान लोग इच्छाजनित कर्मो के त्याग को “सन्यास” कहते है और विद्वान लोग सभी कर्मों के फलो के त्याग को “त्याग” कहते हैं
।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें