भगवद्गीता
शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017
सात्विक त्याग
त्याग के सम्बंध में आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर अर्जुन को बताये कि परन्तु जो व्यक्ति नियत कर्तव्य को अपना करने योग्य कार्य मान कर करता है और उसके प्रति सम्पूर्ण आसक्ति तथा फल को त्याग देता है
,
उसका त्याग सात्विक माना जाता है ।
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