भगवद्गीता
बुधवार, 11 अक्टूबर 2017
तामसिक त्याग
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि किसी भी नियत किये गये कर्म का त्याग उचित नहीं है । अज्ञान के कारण इस प्रकार के कर्म का त्याग तामसिक ढंग का त्याग कहलाता है ।
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