शाब्दिक अर्थ के
भाव में कार्य को करने वाला । गुरू के उपदेश के अनुसार कर्ता कर्म के पाँच कारणों
मे से एक है । साँख्य सिद्धांत के अनुसार आत्मा केवल साक्षी है । उचिततम
अभिव्यक्ति में आत्मा अकर्ता है । प्रकृति आत्मा की उपस्थिति मात्र से गतिमान हो
जाती है इसलिये गुरू ने उसे कर्म के कारणों में सम्मलित किया है ।
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