गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017

कर्ता

शाब्दिक अर्थ के भाव में कार्य को करने वाला । गुरू के उपदेश के अनुसार कर्ता कर्म के पाँच कारणों मे से एक है । साँख्य सिद्धांत के अनुसार आत्मा केवल साक्षी है । उचिततम अभिव्यक्ति में आत्मा अकर्ता है । प्रकृति आत्मा की उपस्थिति मात्र से गतिमान हो जाती है इसलिये गुरू ने उसे कर्म के कारणों में सम्मलित किया है । 

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