भगवद्गीता
मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017
सात्विक कर्म
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि प्रकृति द्वारा आदेशित कर्म
,
जिसे बिना आसक्ति के
,
बिना किसी मोंह अथवा घृणा की भावना से युक्त हुये
,
जिसे बिना किसी फल की अपेक्षा से किया जाता है उसे सात्विक कर्म कहा जाता है ।
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