बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

मुक्ति पथ

भगवद्गीता में इच्छा का त्याग करके कर्म करने को सन्यास बताया गया है इस आलोक में कर्म के फल का त्याग, को, त्याग का लक्ष्यार्थ माना जायेगा । मुक्ति त्याग से मिलती है । इच्छाओं के त्याग द्वारा फल का त्याग स्वत: प्राप्त हो जायेगा |

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