बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

पाँचवा भाग्य

कार्य के उपकरणों का विस्तार बताते हुए गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि कार्य का स्थान और इसी प्रकार कर्ता, विविध प्रकार के साधन, विविध प्रकार की चेष्टायें और पाँचवा भाग्य । 

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