गुणों के विज्ञान
में ज्ञान के वर्गीकरण को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये
कि परंतु जो ज्ञान किसी एक कार्य को ही सब कुछ मान लेता है और उसके कारण का कोई
ध्यान नहीं रखता और तत्वार्थ को नहीं समझ पाता और जो संकीर्ण है, वह तामसिक ढंग का
ज्ञान कहलाता है ।
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