रविवार, 22 अक्टूबर 2017

अ-प्रशिक्षित बुद्धि

कर्म के कारणों को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि ऐसी दशा में जो विकृत मन वाला मनुष्य अपनी अ-प्रशिक्षित बुद्धि के कारण अपने आप को कर्ता समझता है, वह सच्ची स्थिति को नहीं देख रहा होता ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें