मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

सन्यास और त्याग

अर्जुन योगेश्वर के समक्ष जिज्ञासा व्यक्त करता है कि हे महाबाहु (कृष्ण), मैं सन्यास और त्याग का पृथक पृथक सच्चा रूप जानना चाहता हूँ, हे हृषीकेश (कृष्ण), हे केशिनिषूदन (कृष्ण) ! 

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