भगवद्गीता
शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017
यज्ञ दान तप
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि कुछ विद्वानो का मत है कि “कर्म को दोष समझकर त्याग देना चाहिये”
,
जबकि अन्य विद्वानों का मत है कि “यज्ञ दान और तप” के कर्मों का त्याग नही करना चाहिये ।
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