मंगलवार, 1 सितंबर 2015

उपलब्धि: लक्षण 1

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस व्यक्ति की आत्मा इंद्रीय वासना वस्तुओं और प्रकृतीय गुणों के प्रति मोंह और अरुचि से मुक्त होकर मौलिक ब्रम्ह स्वरूप में स्थिर हो जाती है, उसे सांसारिक द्वैत के विषय, सुख और दु:ख की अनुभूति नहीं करा पाते है और वह सतत् चिर  शांति की अनुभूति करता है । 

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