भगवद्गीता
बुधवार, 30 सितंबर 2015
उपलब्धि की व्याख्या
गुरू द्वारा बताये गये योग में स्थापित व्यक्ति की स्थिति की व्याख्या करते हुये कहा गया कि अहंकार का पूर्ण समर्पण होने पर ही योग की स्थिति पायी जा सकती है । सत्य ब्रम्ह है । आत्मा मात्र किसी कार्य विषेस के लिये किसी विशिष्ट शरीर में स्थापित है ।
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