रविवार, 10 जनवरी 2016

आंशिक उपलब्धि

जो व्यक्ति निर्गुण, निराकार, निरंजन ब्रम्ह की साधना नहीं कर पाते हैं वे व्यक्ति अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिये मेरे प्रकृति निर्मित रूप की आराधना द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं । वास्तविक उपलब्धि मोंह से मुक्ति द्वारा होती है इसलिये इच्छाओं की पूर्ति के रूप में हुई उपलब्धि मात्र उनका संतोष है । मोंह से मुक्ति तो योगाभ्यास द्वारा ही मिलती है । 

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