कोई
भी जिज्ञासु अपने लक्षित उद्देष्य को पाने के लिये कोई सार्थक प्रयत्न तभी कर सकता
है जबकि उसे ल्क्ष्य का सही स्वरूप एवं लक्ष्य को पाने के लिये प्रयोग में लाये जा
रहे साधनों की सही क्षमता का यथार्थ ज्ञान होगा । वर्तमान प्रकरण में लक्ष्य है ब्रम्ह, साधन है यह साधक की शरीर
। अर्जुन अपने प्रश्नों के द्वारा इन्ही दोनों को जानने के लिये गुरू से निवेदन
करता है । अर्जुन की जिज्ञासा है कि गुरू उसे मार्गदर्शन करावें कि ब्रम्ह का क्या
स्वरूप वह मस्तिष्क में धारण करके वह प्रयत्न करे । अर्जुन की जिज्ञासा है उपरोक्त
लक्ष्य को पानेके लिये इस शरीर की क्या क्षमता है और वह उसका कैसे प्रयोग करे ।
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