अर्जुन द्वारा पूछे गये प्रश्न इस रूप संसार की संरचना में
प्रयुक्त अवयवों को अधिक विस्तार पूर्वक जानने की जिज्ञासा की पूर्ति के लिये हैं
। इससे भी आगे इस रूप संसार की उत्पत्ति का निमित्त अर्थात् कर्म का विश्लेषणात्मक
विज्ञान जानने की जिज्ञासा की पूर्ति के निमित्त से है । इन्ही जिज्ञासाओं को उसने
प्रश्न के माध्यम से गुरू श्रेष्ठ के सम्मुख रखा है । उसकी जिज्ञासा मनुष्य की
उत्पत्ति का विज्ञान तथा कर्म का विज्ञान से सम्बंधित है ।
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