शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

प्रकृति का प्रलय

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये कि कई जन्मों पर्यंत प्रयत्नो को करते हुये, मनुष्य को यह ज्ञान होता है कि स्वयं मेरे ही अंदर विद्यमान ब्रम्ह ही सर्वस्य है, तब वह पूर्ण रूप से ब्रम्ह को समर्पित हो जाता है । हे अर्जुन ऐसी आत्मायें विरले ही मिलती हैं । 

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