गुरू मूर्ति पूजा में विश्वास को विधि सम्मत बतलाते हैं । गुरू
का कहना है कि ब्रम्ह भक्त की आस्था को महत्व देते हैं । यदि भक्त की आस्था दृढ है
तो ब्रम्ह भक्त की प्रार्थना सुनकर स्वयं झुक जाते हैं । ब्रम्ह के ही रूप का
विस्तार समस्त संसार में है । इसलिये भक्त जिसभी रूप में अपनी आस्था दृढ करके उसे
ब्रम्ह स्वरूप मानकर प्रार्थना करता है,
ब्रम्ह भक्त की आस्था को देख उसी रूप में प्रगट होकर उसे वाँक्षित फल देकर उसकी उस
रूप में आस्था को दृढ कर देते हैं ।
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