भगवद्गीता
सोमवार, 11 जनवरी 2016
सत्य अद्वितीय
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि अज्ञानी व्यक्ति मुझे रूपधारी समझते हैं यद्यपि कि मैं सदा बिना रूप के हूँ । ऐसे ही व्यक्ति मेरी उच्चतर प्रकृति आत्मा को भी नहीं जानते हैं जो कि सदा अपरिवर्तनीय है और महानतम है ।
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