अर्जुन द्वारा पूछे गये प्रश्नों का उत्तर देते हुये योगेश्वर
श्रीकृष्ण बताये कि ब्रम्ह अक्षर है जो कि ज्ञात लोकों के सभी ज्ञात ज्ञान से ऊपर
है, उसकी अपरिवर्तनीय प्रकृति हमारी
आत्मा है, कर्म वह सृजनात्मक ऊर्जाफल है
जिससे समस्त जीव रूपों की उत्पत्ति हुई है ।
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