शनिवार, 2 जनवरी 2016

वासुदेव सर्वस्य

एक स्थिति जब कि मनुष्य की निम्नतर प्रकृति अपनी ही उच्चतर प्रकृति के वर्चस्व को स्वीकार कर लेवे, निम्नतर प्रकृति उच्चतर प्रकृति की अनन्य बन जाय, निम्नतर प्रकृति पूर्णतया उच्चतर प्रकृति में विलय कर जाय यहाँ तक कि मनुष्य का स्वरूप उसकी उच्चतर प्रकृति ही निरूपित करे तो ऐसे व्यक्ति के लिये कहा जावेगा वासुदेव सर्वस्य । 

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