आत्मा के संस्कार उसके साथ जाते हैं । विगत जन्म के संस्कार के
अनुसार मोंहग्रसित आत्मा को नई शरीर मिलती है । इस प्रकार जीव का जन्म मोंह और
भ्रम के मध्य ही होता है । पुन: इस जन्मजात मोंह के प्रभाव से नये जन्म में
इच्छायें और अरुचियाँ जन्म लेती हैं । इनके प्रभाव से सांसारिक द्वैतों का त्रास
भोगते जीव जीवन जीता है ।
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