शनिवार, 23 जनवरी 2016

भौतिक एवं दैविक

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति मुझे भौतिक एवं दैविक गतिविधियों का नियंत्रक, सभी कर्म आहुतियों का ग्रहणकर्ता के रूप में जानता है और मुझमें अपने मस्तिष्क को एकीकृत रखते हुये प्रकृतीय मोंह से मुक्त होता है, वह व्यक्ति मुझे जानने में सफल होता है । 

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