रविवार, 24 जनवरी 2016

सफल ज्ञाता की व्याख्या

गुरू का कथन इस बात पर बल देता है कि जिस समय व्यक्ति के एकाग्रता का अंतरण होता है उस समय उसके मस्तिष्क की एकाग्रता ब्रम्ह को उन्मुख होनी चाहिये । इसका अभिप्राय इस प्रकार है कि मोंहके विषयों का अंतरण नहीं वाँक्षित है बल्कि मोंह का त्याग वाँक्षित होता है । इस त्याग के साथ एकाग्रता का अंतरण ब्रम्ह को उन्मुख होना अपेक्षित होता है । 

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