ब्रम्ह की दो प्रकार की प्रकृति प्रगट होती है । प्रथम वह जिसे
आठ वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है । यह प्रकृति परिवर्तनशील होती है । यह रूप
धारण करती है । द्वितीय वह जो कि प्रत्येक परिस्थिति में एक ही रहती है
अ-परिवर्तनशील होती है । यह कोई रूप धारण नहीं करती है । यही आत्मा है । यह
परिवर्तनशील प्रकृति द्वारा निर्मित शरीर अ-परिवर्तनशील प्रकृति आत्मा के अवलम्ब
पर स्थिर होती है । यह आत्मा ही इस रूप संसार में ब्रम्ह का प्रतिनिधित्व करती है
। यह इस वस्तु संसार के लिये विषय स्वरूप है ।
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