भगवद्गीता
शुक्रवार, 13 मई 2016
यज्ञ कर्म आहुति सभी ब्रम्ह
ब्रम्ह के रहस्य को आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि धार्मिक कर्म मैं हूँ
,
मैं ही यज्ञ हूँ
,
मैं ही आदि कालीन आहुति हूँ
,
मैं ही पावन मंत्र हूँ
,
मैं ही घी हूँ
,
मैं ही अग्नि हूँ
,
मैं ही यज्ञ कर्ता हूँ ।
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