गुरुवार, 26 मई 2016

शून्य दशा की व्याख्या

ब्रम्ह निर्विवाद सत्य है जबकि उस निर्विवाद सत्य की अभिव्यक्ति यह रूप संसार असत्य है । ब्रम्ह ही दोनों है । जब बह अपने को रूपों में प्रगट करता है तो यह रूप संसार वर्तमान स्वरूप में होता है । जब वह अव्यक्त दशा में रहता है तो वही रूप संसार की शून्य दशा होती है । उसी शून्य दशा से ही यह समस्त रूप प्रगट होते हैं । परंतु यह समस्त रूप मात्र ब्रम्ह का निरूपण है ब्रम्ह नहीं हैं ।   

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