ब्रम्ह निर्विवाद सत्य है जबकि उस निर्विवाद सत्य की अभिव्यक्ति
यह रूप संसार असत्य है । ब्रम्ह ही दोनों है । जब बह अपने को रूपों में प्रगट करता
है तो यह रूप संसार वर्तमान स्वरूप में होता है । जब वह अव्यक्त दशा में रहता है
तो वही रूप संसार की शून्य दशा होती है । उसी शून्य दशा से ही यह समस्त रूप प्रगट
होते हैं । परंतु यह समस्त रूप मात्र ब्रम्ह का निरूपण है ब्रम्ह नहीं हैं ।
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