ब्रम्ह इस विनाशशील रूप संसार से भिन्न चिर है । मृत्यु इस रूप
संसार के लिये प्रभावी होती है जो कि ब्रम्ह की अभिव्यक्ति मात्र है । अभिव्यक्ति
विनाशशील है क्योंकि यह ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित है । ब्रम्ह की
उच्चतर प्रकृति अविनाशी है । इसीलिये गुरू के उपदेश मनुष्य को अपना जीवन ब्रम्ह की
उच्चतर प्रकृति के अनुरूप बनाने का पथ प्रशस्थ करते हैं ।
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