गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि वेदों के ज्ञाता
संत सोमरस का पान कर अपने पापों से मुक्त होकर, यज्ञ कर्म में आहुतियों को अर्पित करके स्वर्गलोक में वास करने
के लक्ष्य से मेरी अस्तुति करते हैं । ऐसे व्यक्ति स्वर्गलोक के अधिपति इंद्र के
राज्य में पहुँचते हैं और देवताओं के सुलभ सुख को भोगते हैं ।
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