सोमवार, 9 मई 2016

अर्पण द्वारा

पुण्यात्मा संत ब्रम्ह को किस रूप में धारण कर, किस भाव को हृदय में संजोये हुये उसे पूजते हैं को बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि ऐसे संत अपने विवेक और ज्ञान की आहुति अर्पित करके मुझे पूजते हैं और मुझे एक एकाकी, अतिविशिष्ट और प्रत्येक दिशा से देखने पर सामने दीखने वाले रूप में ग्रहण करके मुझे पूजते हैं । 

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