परिवर्तनशील आठ वर्गीय निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित यह रूप
संसार विनाशशील है । ब्रम्ह अविनाशी अक्षर है । उसकी उच्चतर प्रकृति इस रूप संसार
का आधार है । जो व्यक्ति विनाशशील प्रकृति को आत्मा के प्रति समर्पित कर उस अक्षर
ब्रम्ह की आराधना करता है, अपने को उस अक्षर ब्रम्ह के
प्रतिनिधि के रूप में वर्तता है वह सत्य गंतव्य को उन्मुख है ।
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