बुधवार, 25 मई 2016

शून्य दशा

ब्रम्ह के रहस्य को और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि मैं ही ताप का उद्भव हूँ, मैं ही वर्षा भी देता हूँ और मैं ही वर्षा को रोकने वाला भी हूँ, मैं ही अमरत्व भी हूँ और मैं ही मृत्यु भी हूँ, मैं ही रूपों की दशा भी हूँ और मैं ही शून्य दशा भी हूँ । 

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