ब्रम्ह
के रहस्य को और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि मैं ही
ताप का उद्भव हूँ, मैं ही वर्षा भी देता हूँ और मैं ही वर्षा को रोकने वाला भी हूँ,
मैं ही अमरत्व भी हूँ और मैं ही मृत्यु भी हूँ, मैं ही रूपों की दशा भी हूँ और मैं ही
शून्य दशा भी हूँ ।
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